नगीना सांसद चन्द्र शेखर आज़ाद ने दी चेतावनी कि अगर भीमराव अंबेडकर का अपमान करने वालों को नहीं मिली सज़ा तो करेंगे आंदोलन।
दोषियों पर एनएसए की धाराओं में मुक़दमा दर्ज हो,इस कृत्य के पीछे मौजूद साज़िश और संरक्षण की भी जांच हो,

नगीना (बिजनौर यूपी)(अनवार अहमद नूर/एशियन पत्रिका)
ग्वालियर में भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषित-वंचितों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान व चेतना के प्रतीक, विश्व-रत्न परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के पुतले को जलाने का प्रयास और उनके विरुद्ध की गई आपत्तिजनक नारेबाज़ी सिर्फ़ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय को खुलेआम चुनौती देने का घिनौना षड्यंत्र है.
यह कृत्य उन नफरती और संविधान-विरोधी ताक़तों की पहचान उजागर करता है, जो आज भी बराबरी, भाईचारे और न्याय से डरती हैं। बाबा साहेब का अपमान दरअसल उन करोड़ों लोगों के आत्मसम्मान पर हमला है, जिन्हें संविधान ने इंसान की तरह जीने का हक़ दिया। यह देश की शांति भंग करने और समाज को बांटने की सुनियोजित कोशिश है। उनकी तरफ से मांग की गई है कि दोषियों पर एनएसए की धाराओं में मुक़दमा दर्ज हो,इस कृत्य के पीछे मौजूद साज़िश और संरक्षण की भी जांच हो, भविष्य में परम पूज्य बाबा साहेब और संविधान के अपमान की किसी भी कोशिश पर शून्य सहनशीलता दिखाई जाए।
उनकी ओर से कहा गया है कि यदि अगले 72 घंटों के भीतर हमारी मांगे पूरी नहीं हुई तो 1 जनवरी को ग्वालियर पहुँचकर परम पूज्य बाबा साहेब और संविधान के सम्मान में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक लेकिन निर्णायक जन-आंदोलन किया जाएगा। जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







