जम्मू-कश्मीर में मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने की खुशी मनाने पर देश भर में प्रतिक्रिया
राजनीति के चलते किस तरह से अच्छे बुरे की तमीज़ ख़त्म हो गई है

शिवसेना नेताओं ने फैसले पर नाराज़गी जताते हुए इस कदम को छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बताया।
नई दिल्ली (एशियन पत्रिका ब्यूरो)
राजनीति के चलते किस तरह से अच्छे बुरे की तमीज़ खत्म हो गई है। ये तब देखने को मिला जब जम्मू-कश्मीर में श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के बाद कुछ लोगों ने खुशियां मनाईं, मिठाई बांटी और नाच गाना किया। जब देश का हितैषी और बुद्धिजीवी मेडिकल कॉलेजों के खोलने की मांग करता है वहीं अक्ल के अंधे मैडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर खुशी प्रकट कर रहे हैं। वो भी इसलिए कि पिछले साल नीट रैंकिंग के आधार पर पहले बैच में दाख़िला पाने वाले 50 छात्रों में से 47 मुस्लिम, एक सिख और केवल दो हिंदू थे। जिसके बाद हिंदुत्व संगठनों और भाजपा के नेताओं ने मेरिट लिस्ट का विरोध करना शुरू कर दिया था। वे यह कहते हुए संस्थान बंद करने की मांग कर रहे थे कि इसे ‘हिंदू तीर्थयात्रियों के दान’ से चलाया जा रहा है इसलिए यहां एमबीबीएस सीटें केवल हिंदू छात्रों के लिए आरक्षित होनी चाहिए और अब जब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने जम्मू-कश्मीर के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाख़िले की पिछले साल सितंबर में दी गई अनुमति को वापस ले लिया है तो इस मामले में देश भर में चर्चाएं, प्रतिक्रिया और तीखी राजनीतिक नोक झोंक शुरू हो गई है।
मान्यता रद्द होने पर खुशी प्रकट करने पर देश भर में फजीहत और ट्रोल होने के बाद कुछ लोगों को लगा कि ये तो बड़ी घटिया और मूर्खता की बात है इसलिए वह अपना ट्रेंड बदल रहे हैं। इसी संदर्भ में हिंदूवादी संगठन शिवसेना के नेताओं की प्रतिक्रिया आई है और उन्होंने मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द करने पर अपना रोष प्रकट किया है।
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शिवसेना नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा है कि यह कदम क्षेत्र के छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि अभिभावकों का सपना था कि उनके बच्चे डॉक्टर बनें और देश का नाम रोशन करें, लेकिन मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। शिवसेना नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिस मेडिकल कॉलेज को प्रधानमंत्री द्वारा विकास का तोहफा बताया गया था, वही तोहफा अब छात्रों से छीन लिया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।
जम्मू-कश्मीर के नेताओं और देश भर के अन्य लोगों ने इसे शिक्षा का सांप्रदायिकीकरण कहा है।
जम्मू कश्मीर के मुख्तमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसकी कड़ी आलोचना की और कहा कि देश के अन्य हिस्सों में लोग अपने इलाके में मेडिकल कॉलेज लाने के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन यहां मेडिकल कॉलेज बंद कराने के लिए लड़ाई लड़ी गई।

शिवसेना नेताओं ने फैसले पर नाराज़गी जताते हुए इस कदम को छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बताया।





