ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री से की मुलाकात

बैठक में मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली (एशियन पत्रिका/अनवार अहमद नूर)

आज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कई मांगों वाला एक ज्ञापन भी मंत्री को सौंपा। बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने में आने वाली दिक्कतों और तकनीकी समस्याओं का विस्तार से ज़िक्र किया, जिनकी वजह से लाखों संपत्तियाँ अपलोड नहीं हो सकीं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वक्फ बोर्डों में पहले से पंजीकृत संपत्तियों को अपलोड करने की ज़िम्मेदारी स्वयं वक्फ बोर्डों को दी जानी चाहिए थी और इस प्रक्रिया के लिए कम से कम दो वर्ष का समय दिया जाना चाहिए था। इसलिए उन्होंने अपलोड न हो सकी संपत्तियों के लिए अंतिम तिथि को कम से कम एक वर्ष बढ़ाए जाने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने आगे बताया कि वक्फ अधिनियम/यूमीद अधिनियम में किए गए संशोधन और धारा 3B के तहत उम्मीद UMEED पोर्टल पर विवरण अपलोड करने की अनिवार्यता के कारण पूरे मुस्लिम समुदाय पर भारी दबाव और कठिनाइयाँ पैदा हो गई हैं। उन्होंने कहा कि सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने के लिए छह महीने का समय बहुत कम था। इसके अलावा, पोर्टल पर बार-बार तकनीकी समस्याएँ और गड़बड़ियाँ सामने आईं, जिनके कारण सभी संपत्तियों को अपलोड करना अत्यंत कठिन और लगभग असंभव साबित हुआ।

उन्होंने बताया कि पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के वक्फ बोर्ड इस संबंध में समय बढ़ाने हेतु ट्रिब्यूनल के पास पहुँच चुके हैं, और ट्रिब्यूनल ने समय-सीमा बढ़ाने की अनुमति भी दे दी है। इससे स्पष्ट है कि वक्फ बोर्ड भी छह महीने की समय-सीमा का पालन नहीं कर सके और उन्हें भी समय-सीमा बढ़ाने की आवश्यकता पड़ी। इसलिए प्रतिनिधिमंडल ने मुतवल्लियों की कठिनाइयों को देखते हुए अपलोडिंग के लिए एक वर्ष की अतिरिक्त अवधि देने का अनुरोध किया।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि कानून में दिए गए समय-सीमा और पोर्टल की वास्तविक कार्यप्रणाली में स्पष्ट अंतर है। उमीद नियम 03/07/2025 को ही अधिसूचित हुए, और अपलोडिंग से संबंधित प्रक्रियाएँ और विवरण भी इसी तारीख को बताए गए। यह उल्लेखनीय है कि मुतवल्लियों और वक्फ बोर्डों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के घोषणा-पत्र भी पहली बार 03/07/2025 को ही जारी हुए। इसलिए पोर्टल की लॉन्च तिथि 06/06/2025—जो कि अधिनियम में निर्दिष्ट आरंभ तिथि भी नहीं है—को अधिनियम की वास्तविक प्रारंभ तिथि नहीं माना जा सकता।

इन सभी परिस्थितियों और कठिनाइयों को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने अधिनियम में दिए गए प्रारंभिक छह माह की अवधि को कम से कम एक वर्ष और बढ़ाने का अनुरोध किया। इसके बाद, यदि आवश्यकता पड़े, तो संबंधित व्यक्ति ट्रिब्यूनल से आगे समय बढ़ाने के लिए संपर्क कर सकते हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वे पोर्टल पर अपलोडिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी और गंभीरता से प्रयासरत हैं। उन्हें विश्वास है कि यदि शुरुआत में एक वर्ष का विस्तार मिल जाए तो संभव है कि आगे ट्रिब्यूनल से समय बढ़ाने की आवश्यकता ही न पड़े, सिवाय किसी विशेष परिस्थिति के।

अंत में, उन्होंने बताया कि वक्फ अधिनियम/यूमीद अधिनियम 1995 की धारा 113 केंद्र सरकार को अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए आदेश जारी करने का अधिकार देती है। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इन मुद्दों का जल्द समाधान निकाला जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल में बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री सैयद सादतुल्लाह हुसैनी, महासचिव मौलाना मोहम्मद फ़ज़लुर रहीम मुजद्दिदी, कार्यकारिणी सदस्य एवं सांसद बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी, पूर्व सांसद एवं बोर्ड सदस्य श्री मोहम्मद अदीब, जमीअत उलमा-ए-हिंद (एम) के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी, जमीअत उलमा हिंद (मौलाना अरशद मदनी समूह) के महासचिव मुफ़्ती अब्दुर रज़्ज़ाक, तथा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों एडवोकेट फ़ाज़िल अहमद अय्यूबी, एडवोकेट हकीम मोहम्मद ताहिर और एडवोकेट नबीला जमी़ल और सांसद चन्द्र शेखर आज़ाद भी शामिल रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *