असम के विशेष मुख्य सचिव एम .के . यादव की विवादास्पद नियुक्ति पर सवाल, निर्वाचन आयोग व मुख्य सचिव से इसपर कार्रवाई की मांग।

असम के विशेष मुख्य सचिव एम .के . यादव की विवादास्पद नियुक्ति पर सवाल, निर्वाचन आयोग व मुख्य सचिव से इसपर कार्रवाई की मांग।

  • असम के विशेष मुख्य सचिव एम .के . यादव की विवादास्पद नियुक्ति पर सवाल, निर्वाचन आयोग व मुख्य सचिव से इसपर कार्रवाई की मांग।

पंकज नाथ, असम, 20 अप्रैल :

असम राज्य सरकार द्वारा नियुक्त वन विभाग के विशेष मुख्य सचिव (वन) एम.के. यादव की नियुक्ति लगातार विवादों के केंद्र में है। आलोचकों का आरोप है कि यादव को अवकाशप्राप्त भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी होने के बावजूद पूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां देकर विशेष मुख्य सचिव के रूप में बनाए रखना राज्य सरकार के अपने नियमों की भावना के विपरीत है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमानुपालन पर सवाल उठ रहे हैं। यादव ने 29 फरवरी 2024 को प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF) और हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) के पद से अवकाश ग्रहण किया था। अवकाश लेने के अगले ही दिन, 1 मार्च 2024 से, असम सरकार ने उन्हें विशेष मुख्य सचिव (वन) के पद पर एक वर्ष की अस्थायी अवधि के लिए दोबारा नियुक्त (re‑engaged) कर दिया, जो उनके अवकाश के तुरंत बाद ही हो गया था। यह नियुक्ति असम के व्यक्तिगत विभाग द्वारा आदेश संख्या AAP.23/2024/6 (दिनांक 29.02.2024) और AAP.23/2024/45 (दिनांक 11.03.2024) के अनुसार जारी की गई थी। इसी विशेष मुख्य सचिव के पद पर चल रही एक वर्ष की अवधि 28 फरवरी 2025 को समाप्त होनी थी, लेकिन असम मंत्रिमंडल की 16 फरवरी 2025 को हुई बैठक के अनुसार उनकी अवस्थायी नियुक्ति को आगे बढ़ा दिया गया। व्यक्तिगत विभाग की अधिसूचना संख्या 524038/66, दिनांक 21 फरवरी 2025 के अनुसार, यादव की नियुक्ति 1 मार्च 2025 से “राज्य सरकार के वर्तमान कार्यकाल के साथ सह‑समाप्ति (co‑terminus)” तक बढ़ा दी गई है, जिसमें उन्हें पूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां दी गई हैं। इस अधिसूचना के अनुसार उनका वेतन उनके अवकाश के समय के मूल वेतन और भत्तों के आधार पर निर्धारित होगा (पेंशन घटाकर), जबकि जीपीएफ, जीआईएस, अन्य भत्ते आदि उन्हें नहीं मिलेंगे। चिकित्सा प्रतिपूर्ति उनके अवकाश से पहले लागू सेवा नियमों के अनुसार ही मिलेगी। हालांकि, असम सरकार के व्यक्तिगत विभाग के ऑफिस मेमो AAP.98/2017/30, दिनांक 18.07.2018 के अनुसार, अवकाशप्राप्त कर्मचारियों की री‑एनगेजमेंट केवल सलाहकार (Adviser), विशेष कर्तव्य अधिकारी (Special Duty Officer) या विशेष कार्यकारी अधिकारी (Special Executive Officer) के रूप में अधिकतम एक वर्ष के लिए ही अनुमत है, और ये पद हेड ऑफ डिपार्टमेंट या विशेष मुख्य सचिव जैसी पूर्ण शक्तियों वाले पदों के समतुल्य नहीं माने गए हैं। इसी आधार पर आलोचकों का दावा है कि यादव को एक वर्ष की अवधि के बाद, और वर्तमान कार्यकाल के अंत तक विशेष मुख्य सचिव के पद पर पूर्ण शक्तियों के साथ बनाए रखना नियमों की भावना के विपरीत है, क्योंकि यह प्रकार की शक्तियां सामान्यतः सेवारत आईएएस अधिकारियों के लिए आरक्षित मानी जाती हैं। इस नियुक्ति को लेकर एक अन्य बड़ा विवाद यह भी है कि चुनाव आयोग के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) के दौरान – यानी 15 मार्च से 4 मई 2026 तक – भी यादव की नियुक्ति को नहीं रद्द किया गया है। “विश्लेषकों का मानना है कि एमके यादव की नियुक्ति रद्द की जानी चाहिए क्योंकि आदर्श आचार संहिता लागू है और मौजूदा सरकार का कार्यकाल एकप्रकार से खत्म हो चुका है। इसलिए निर्वाचन आयोग और मुख्य सचिव को इसपर ध्यान देकर शीघ्र कारवाई करने की मांग की जा रही है। पारदर्शी एवं निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के हित में सचेत मंडली ने राजनीतिक स्वभाव की इस असामान्य नियुक्ति को रद्द करने की भी मांग की है। सचेत मंडली ने निर्वाचन आयोग से असम सरकार को इसके ऊपर आवश्यक निर्देश जारी करने का आह्वान भी किया है।

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