मदरसा बाबुल उलूम जाफ़राबाद में वार्षिक सामूहिक परीक्षा के बाद दस्तार-ए-फ़ज़ीलत का जलसा होगा

सामूहिक परीक्षाएँ छात्रों के भविष्य को सँवारने में सहायक होती हैं: मौलाना ओवैस अहमद रशीदी

नई दिल्ली (एशियन पत्रिका/अनवार अहमद नूर)

दिल्ली के प्रसिद्ध दीऩी व असरी शिक्षण संस्थान मदरसा बाबुल उलूम जाफ़राबाद, दिल्ली में 25 जनवरी को वार्षिक सामूहिक परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। इन सामूहिक परीक्षाओं में उत्तर-पूर्वी दिल्ली ज़िले के दर्जनों मदरसों के सैकड़ों छात्र भाग लेंगे।
इसके साथ ही मदरसा से फ़ारिग़ होने वाले छात्रों का वार्षिक जलसा-ए-दस्तार-ए-फ़ज़ीलत (हुफ़्फ़ाज़-ए-किराम) इसी माह 29 जनवरी को आयोजित होगा। इस अवसर पर इस वर्ष हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन करीम की तकमील करने वाले छात्रों की उलमा-ए-किराम के हाथों दस्तार-ए-फ़ज़ीलत बाँधी जाएगी। साथ ही शोबा-ए-क़िराअत से फ़ारिग़ होने वाले छात्रों की भी दस्तार की रस्म अदा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मदरसा बाबुल उलूम जाफ़राबाद, दिल्ली से एक दर्जन से अधिक छात्रों को हाफ़िज़-ए-क़ुरआन के रूप में दस्तार से नवाज़ा जाएगा।
मदरसा के मोहतमिम मौलाना ओवैस अहमद रशीदी ने इस अवसर पर कहा कि मदरसा बाबुल उलूम का यह गौरवशाली इतिहास रहा है कि हर वर्ष यहाँ से दर्जनों छात्र हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन करीम से फ़ारिग़ होते हैं। अब तक हज़ारों छात्र यहाँ से शिक्षा प्राप्त कर देश के विभिन्न हिस्सों में क़ौम व मिल्लत की सेवा कर रहे हैं।
मौलाना ने आगे कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सामूहिक परीक्षाओं में ज़िले के विभिन्न मदरसों के छात्र भाग लेंगे। सामूहिक परीक्षाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ये परीक्षाएँ शैक्षिक व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से छात्रों की क्षमता, परिश्रम और योग्यता का प्रभावी आकलन होता है।
सामूहिक परीक्षाओं के ज़रिए प्रतिभाशाली और मेहनती छात्रों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं। ये परीक्षाएँ छात्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करती हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और समय की पाबंदी जैसी गुणों का विकास होता है। साथ ही ये परीक्षाएँ छात्रों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक परीक्षाओं के माध्यम से समाज को योग्य और ज़िम्मेदार व्यक्ति प्राप्त होते हैं, जो देश और क़ौम की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तव में, सामूहिक परीक्षाएँ छात्रों के भविष्य को सँवारने में सहायक सिद्ध होती हैं।

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