बरेली में निजी मकान में नमाज़ पढ़ने पर हिरासत में लेना संविधानिक अधिकारों पर हमला : महेन्द्र सिंह ( उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष SDPI)
धार्मिक अल्पसंख्यकों की आस्थाओं को संदेह और दमन की दृष्टि से देखा जा रहा है।

लखनऊ (अनवार अहमद नूर/एशियन पत्रिका)
उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले के बिशारतगंज थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदगंज में एक निजी मकान में नमाज़ अदा करने पर 12 लोगों को हिरासत में लिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है।
एसडीपीआई उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह ने कहा है कि यदि इस घटना से किसी प्रकार का वास्तविक कानून-व्यवस्था का ख़तरा नहीं था, तो पुलिस द्वारा निरोधात्मक कार्रवाई किए जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब निजी घर में शांतिपूर्वक इबादत करने के लिए भी पुलिस की अनुमति आवश्यक हो गई है-?
महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि यह घटना दर्शाती है कि किस प्रकार धार्मिक अल्पसंख्यकों की आस्थाओं को संदेह और दमन की दृष्टि से देखा जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की आत्मा के खिलाफ बताया। एसडीपीआई ने सरकार से मांग की है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाए। इस कार्रवाई के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और धर्म के आधार पर की जा रही पुलिसिया मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर ख़तरा बन सकती हैं।







