सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने उठाई पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की मांग

यूपी अध्यक्ष निज़ामुद्दीन खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को लिखा पत्र

लखनऊ (एशियन पत्रिका/अनवार अहमद नूर)

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के यूपी अध्यक्ष निज़ामुद्दीन खान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट (अब प्रयागराज हाईकोर्ट) प्रदेश का एकमात्र उच्च न्यायालय है, जिसकी केवल एक स्थायी बेंच लखनऊ में है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश—विशेषकर मेरठ—से पिछले कई दशकों से बेंच स्थापना की मांग उठाई जाती रही है परंतु आज तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष निज़ामुद्दीन खान ने पत्र में यह तथ्य मुख्यतः उठाया कि लगभग 54% वाद पश्चिमी यूपी से आते हैं, लेकिन यहां हाईकोर्ट की कोई बेंच न होने से वादकारियों को भारी आर्थिक, समय की और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। न्याय की सभी तक सरल पहुँच (Access to Justice) का संवैधानिक अधिकार इस स्थिति में प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अपने पत्र में भारत के संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 तथा उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट (अधिकरण स्थापना) आदेश, 1948 और संविधान के अनुच्छेद 231 का संदर्भ देते हुए कहा कि हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की स्थापना का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है। विशेष रूप से, 1972 में राष्ट्रपति द्वारा पश्चिमी यूपी में बेंच स्थापित करने के अधिकार का प्रयोग किया गया था, लेकिन फुल कोर्ट की सहमति न मिलने के कारण आदेश लागू नहीं हो सका। यूपी अध्यक्ष ने माननीय मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना पर फुल कोर्ट द्वारा पुनर्विचार किया जाए तथा इस दिशा में महामहिम राष्ट्रपति को संस्तुति भेजी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेंच की स्थापना से न्याय तक पहुंच सुदृढ़ होगी, वादकारियों का बोझ कम होगा, लंबित वादों का निस्तारण तेज़ होगा, तथा संविधान की मूल भावना “न्याय सबके लिए” का विस्तार होगा। एस.डी.पी.आई. ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग केवल क्षेत्रीय विकास का विषय नहीं, बल्कि न्यायिक समानता और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है। पत्र की कापी महामहिम राष्ट्रपति को भी भेजी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *