पश्चिम यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने का बंद,प्रदर्शन, रैलियां,नारेबाज़ी हुई और दिए ज्ञापन पत्र।
सरकार ने मांग पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज़ करने की दी चेतावनी

लखनऊ/मुरादाबाद/मेरठ (एशियन पत्रिका ब्यूरो/अनवार अहमद नूर)
पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के 22 ज़िलों में बंद का आयोजन किया गया। यह बंद हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने किया है। 22 जिलों के अधिवक्ताओं और 1200 से अधिक संगठन भी हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अपना समर्थन दे रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में वकीलों ने प्रदर्शन, रैली और बंद रखा। मेरठ मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर रामपुर से लेकर मुरादाबाद तक बैंच स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं और उनके समर्थकों ने अपना अभियान चलाया जिसमें बाजार स्कूल और दुकानों की बंदी से लेकर मार्च निकालना और नारेबाज़ी तक किया गया। पश्चिम यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन पत्र भी प्रेषित किए। मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में अधिवक्ताओं ने एसडीएम प्रीति सिंह के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने कहा कि पिछले लगभग 50 वर्षों से पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन अब तक सरकारों द्वारा इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
अधिवक्ताओं ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर पूरे प्रदेश में अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया है।
कई स्थानों पर अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मांग पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा और आर-पार की कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
मेरठ में ऐतिहासिक बंद का असर सुबह से ही रहा। खैरनगर, सुमित बुढ़ाना गेट, जिमखाना मैदान समेत कई इलाकों में दुकानों के शटरों पर ताले लटके रहे। वहीं, डॉक्टरों ने भी ओपीडी कैंसिल कर रखी है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं बहाल हैं। वहीं, शहर के स्कूल-कालेजों को भी बंद रखा गया है। वकीलों ने जगह-जगह धरना प्रदर्शन किया और कहा- बेंच नहीं, तो वोट नहीं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होने से एक ओर जहां वकीलों को मुकदमों की पैरवी में सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वादी-प्रतिवादी को इलाहाबाद तक सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा से राहत मिलेगी। इससे न्याय प्रक्रिया अधिक सुलभ और प्रभावी होगी।







