“बहुभाषी भारत में उर्दू भाषा और संस्कृति” विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर/एशियन पत्रिका)

राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद द्वारा 06 से 08 फ़रवरी 2026 तक “बहुभाषी भारत में उर्दू भाषा और संस्कृति” विषय पर आयोजित किए जाने वाले तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन के संबंध में राष्ट्रीय उर्दू परिषद के मुख्यालय जसोला, नई दिल्ली में एक प्रेस मीट आयोजित की गई। पत्रकारों को संबोधित करते हुए निदेशक डॉ. शम्स इक़बाल ने अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन के विवरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा अतीत में भी अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलनों का आयोजन किया जाता रहा है। एक अंतराल के बाद पिछले वर्ष “विकसित भारत का विज़न, उर्दू भाषा का मिशन” विषय पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसे उर्दू जगत से व्यापक सराहना मिली। इस वर्ष का सम्मेलन उसी श्रृंखला की एक कड़ी है और अपने विषय “बहुभाषी भारत में उर्दू भाषा और संस्कृति” के कारण विशिष्ट भी है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में बहुभाषी भारत की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी तथा भारत के निर्माण और विकास में अन्य भाषाओं के साथ उर्दू भाषा के योगदान से परिचित होने का अवसर भी प्राप्त होगा। डॉ. शम्स इक़बाल ने आगे बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में उद्घाटन सत्र और तकनीकी सत्रों के अलावा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है। तकनीकी सत्रों में विद्वान विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे, वहीं मुशायरा, शाम-ए-ग़ज़ल जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन के आयोजन का एक उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्दू भाषा और संस्कृति की प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है। एक विज्ञापन के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं को विभिन्न उपविषयों पर शोध-पत्र लिखने के लिए आमंत्रित किया गया था, जिनमें से तीन शोध-पत्र सम्मेलन के स्तर और प्रकृति के अनुरूप पाए गए। इन तीनों युवा लेखकों को भी सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है।

सम्मेलन में प्रतिभागियों को आमंत्रित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि भारत के सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व हो सके। इसी प्रकार वरिष्ठ साहित्यकारों और विद्वानों के साथ-साथ महिलाओं और नई पीढ़ी के लेखकों को भी अवसर प्रदान किया गया है। इस सम्मेलन में भारत के अलावा यूके, स्वीडन, फ्रांस, मॉरीशस, जापान, मिस्र और क़तर जैसे देशों से लगभग 90 विद्वान भाग ले रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन 2026 से संबंधित इस प्रेस मीट में उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी के विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया चैनलों आदि के पत्रकार, संवाददाता और संपादक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. शम्स इक़बाल ने पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा कि यह सम्मेलन बहुभाषी भारत में उर्दू भाषा और संस्कृति की प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा और उर्दू भाषा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विज़न को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।

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