मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद द्वारा छात्र सहभागिता के संवर्धन पर प्रशिक्षण कार्यशाला
शैक्षिक जगत में इसे मौलाना आजाद उर्दू यूनिवर्सिटी की एक सकारात्मक और प्रभावी पहल के रूप मे सराहा गया



निज़ामाबाद,(एशियन पत्रिका/अनवार अहमद नूर)
मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के तत्वावधान में “छात्र सहभागिता (Student Engagement)” विषय पर एक महत्वपूर्ण और दृष्टि-वर्धक एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 18 दिसंबर 2025 को गिरराज गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज (स्वायत्त), निज़ामाबाद में आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को शिक्षण प्रक्रिया में छात्रों की सक्रिय भागीदारी और मानसिक संलग्नता की आधुनिक अवधारणाओं से अवगत कराना तथा कक्षा-कक्ष को अधिक उद्देश्यपूर्ण, गतिशील और प्रभावी बनाने के व्यावहारिक तरीकों पर मार्गदर्शन प्रदान करना था।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. पी. राम मोहन रेड्डी, प्राचार्य, गिरराज गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज (स्वायत्त), निज़ामाबाद ने की, जबकि डॉ. नाहिदा बेगम, अकादमिक समन्वयक, कॉलेज ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने संबोधनों में वक्ताओं ने इस प्रकार की प्रशिक्षण गतिविधियों को शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला का पहला सत्र “छात्र सहभागिता की समझ” शीर्षक से आयोजित हुआ, जिसमें प्रोफेसर मोहम्मद अब्दुस्समीअ सिद्दीकी, निदेशक, CPDUMT, मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्तमान समय में केवल जानकारी का संप्रेषण पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को सीखने की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बनाना समय की प्रमुख आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों की बौद्धिक, भावनात्मक और व्यवहारिक सहभागिता को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों को अपनी शिक्षण रणनीतियों में रचनात्मक और संवादात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। दूसरा सत्र “सक्रिय शिक्षण रणनीतियाँ” शीर्षक से आयोजित हुआ, जिसमें डॉ. फरहत अली, एसोसिएट प्रोफेसर, शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग, मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने अपने विचार रखे। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सक्रिय शिक्षण, समूह गतिविधियों, प्रश्नोत्तर, समस्या-समाधान अभ्यासों तथा छात्र-केंद्रित शिक्षण के लाभों पर प्रकाश डाला और बताया कि ये तरीके किस प्रकार छात्रों की रुचि और सीखने की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। दोपहर के भोजन के बाद आयोजित सत्र “छात्र सहभागिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका” ने कार्यशाला को एक आधुनिक और समकालीन आयाम प्रदान किया। इस सत्र में पुनः प्रोफेसर मोहम्मद अब्दुस्समीअ सिद्दीकी ने शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग, डिजिटल टूल्स तथा तकनीक के माध्यम से कक्षा-कक्ष में छात्रों का ध्यान और सहभागिता बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों को आधुनिक शैक्षिक तकनीक से लाभ उठाने और उसे उर्दू माध्यम के संदर्भ में प्रभावी ढंग से प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। शेख़-उल-जामिया प्रोफेसर सैयद ऐनुल हसन के संरक्षण में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यशाला शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी और विचारोत्तेजक सिद्ध हुई, जिससे उन्हें शिक्षण के नए दृष्टिकोण और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। शैक्षिक जगत में इसे मौलाना आजाद उर्दू यूनिवर्सिटी की एक सकारात्मक और प्रभावी पहल के रूप मे सराहा गया।






