अजमेर में स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (रह.) की दरगाह अनेक विवादों और धमकियों के घेरे में

814वें वार्षिक उर्स के अवसर पर खादिमों को लाइसेंस देने के मुद्दे पर कमेटी में विवाद, बुलडोजर कार्रवाई, बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस प्रशासन का लगातार हस्तक्षेप आदि से दरगाह चर्चाओं में है।

(एशियन पत्रिका के लिए अनवार अहमद नूर की रिपोर्ट)

राजस्थान के मशहूर शहर अजमेर में पूरी दुनिया में मशहूर, ग़रीब नवाज़ ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह आजकल सबसे ज़्यादा चर्चाओं, विवादों और ख़बरों में है क्योंकि अब जब यहां 814वें उर्स का आगाज़ होने जा रहा है तब यहां अनेक प्रकार की गतिविधियों में तेज़ी देखी जा रही है। असमाजिक, साम्प्रदायिक और हिंसक तत्वों ने दरगाह की तरफ़ निशाने साधने की कोशिशें करनी शुरू कर दी हैं।‌ पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा के अनुसार दरगाह को बम से उड़ाने की धमकी का ईमेल 4 दिसंबर 2025 को दोपहर ज़िला कलेक्टर के दफ्तर में भेजा गया। इसमें लिखा हुआ है कि दरगाह के साथ ही अजमेर के परमाणु संयंत्र और कलेक्ट्रेट परिसर को उड़ा दिया जाएगा। बम से उड़ाए जाने की धमकी मिलने के बाद अजमेर दरगाह को पूरी तरह खाली कराया गया, पुलिस ने बम डिस्पोजल स्क्वाड के साथ दरगाह परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया, हालांकि इसमें कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला लेकिन दरगाह परिसर से श्रद्धालुओं को बाहर निकाला गया, सुरक्षा एजेंसियों के ताम-झाम से इस सोहार्द वाले क्षेत्र और श्रद्धालुओं पर प्रभाव पड़ा है।
इससे पहले यहां नगर निगम ने अंदरकोट, अढ़ाई दिन की मस्जिद और आसपास के इलाकों में अतिक्रमण हटाने के अभियान के नाम पर बुलडोजर कार्रवाई की। दरगाह से जुड़े सज्जादानशीनों ने इसे भी अच्छा नहीं माना है।
इससे पूर्व ग़रीब नवाज़ हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (रह.) के 814वें सालाना उर्स की तैयारियों को परखने के लिए ज़िला कलेक्टर और एसपी अपने सरकारी अमले के साथ दरगाह शरीफ़ में पहुंचे और दरगाह कमेटी, अंजुमन और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था,सफाई,भीड़ प्रबंधन,पार्किंग, पानी और बिजली की व्यवस्था सहित सभी बिंदुओं पर चर्चा की। इस दौरान अंजुमन सैयद ज़ादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने ज़िला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के समक्ष दरगाह कमेटी के सचिव  बिलाल  पर अनेक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उर्स की तैयारियों के कार्यों में अनियमितता बरती जा रही है और पारदर्शिता का अभाव है। जिसके उत्तर में कमेटी के सचिव बिलाल  ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सारी व्यवस्थाएं कमेटी के नियमों के तहत ही हो रही हैं। दोनों पदाधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों ने समझा-बुझाकर शांत कराया। मौके पर अंजुमन कमेटी, यादगार कमेटी, दरगाह कमेटी के पदाधिकारीगण एवं जिला प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। ज़िला कलेक्टर ने सभी पक्षों से आपसी समन्वय बनाए रखते हुए उर्स को भव्य और शांतिपूर्ण बनाने का आह्वान किया।
अजमेर स्थित दरगाह में ख्वाजा का 6 दिवसीय सालाना उर्स चांद दिखने पर 20 दिसंबर से शुरू होगा। इससे पहले 15 दिसंबर को ऐतिहासिक बुलंद दरवाजे पर उर्स का झंडा चढ़ेगा। केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली दरगाह कमेटी के व्यवस्थापक एवं सचिव बिलाल खान कहते हैं कि उर्स शुरू होने से पहले दरगाह के पांच हज़ार खादिमों को लाइसेंस दे दिए जाएं। ताकि उर्स में दरगाह के अंदर ज़ायरीन के लिए अच्छे इंतज़ाम हो सकें। ख़ादिम दरगाह के अंदर अपना पहचान पत्र लेकर आएं इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे रखे हैं। खादिमों को पहचान पत्र (लाइसेंस) देने के लिए अजमेर की ज़िला अदालत में मामला भी लंबित है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं, इसलिए दरगाह कमेटी के नाजिम बिलाल खान अपनी ओर से कोई कोताही बरतना नहीं चाहते, लेकिन वहीं खादिमों ने स्पष्ट कर दिया है कि ख्वाजा उर्स से पहले खादिम समुदाय पहचान पत्र लेने का कोई काम नहीं करेगा। 27 नवंबर को दरगाह कमेटी की ओर से तीसरी बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक के बारे में खादिमों की दोनों प्रतिनिधि संस्था अंजुमन शेख़ज़ादगान और सैयद ज़ादगान के पदाधिकारियों को सूचित कर दिया गया था। पिछली बैठक में अंजुमन सैयद ज़ादगान के अध्यक्ष गुलाम किबरिया ने नाज़िम को पत्र देकर सूचित किया था कि अंजुमन के सचिव सरवर चिश्ती विदेश दौरे पर हैं। इसलिए बैठक में भाग नहीं लिया जा सकता। किबरिया के इस पत्र के आधार पर ही दरगाह कमेटी ने 27 नवंबर को अगली बैठक निर्धारित की, लेकिन 27 नवंबर की बैठक में आने के बजाए खादिम समुदाय ने मोइनिया हॉल में अलग से बैठक की। इस बैठक में अंजुमन के अध्यक्ष गुलाम किबरिया, उपाध्यक्ष सैयद कलिमुददीन चिश्ती, सैयद हसन हाशमी, असलम हुसैन, मुनव्वर चिश्ती, गफ्तार हुसैन, एहतेशाम अहमद चिश्ती, अंजुमन शेख़ज़ादगान के सचिव शेख इज़हार चिश्ती आदि ने आरोप लगाया कि दरगाह कमेटी उर्स से पहले माहौल खराब करना चाहती है, इसलिए खादिमों को लाइसेंस देने, दरगाह के अंदर कथित अतिक्रमण हटाने जैसे मुद्दों को उठाया जा रहा है। जबकि खादिम समुदाय तो ज़िला प्रशासन और दरगाह कमेटी के साथ मिलकर उर्स में आने वाले ज़ायरीनों की सुविधा के लिए काम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि दरगाह कमेटी की पहली प्राथमिकता ख्वाजा साहब के सालाना उर्स को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की होनी चाहिए। खादिमों ने 27 नवंबर को समानांतर बैठक कर स्पष्ट कर दिया है कि उर्स से पहले कोई खादिम पहचान पत्र नहीं लेगा। वहीं दरगाह कमेटी के सचिव बिलाल खान और सहायक सचिव डॉ. मोहम्मद आदिल का कहना है कि कमेटी जो भी कार्य कर रही है,वह न्यायिक आदेशों के तहत है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने दरगाह कमेटी को आदेश दिए हैं, इसलिए कमेटी दरगाह खादिमों को पहचान पत्र देने की प्रक्रिया कर रही है। दरगाह के अंदर खादिमों ने जो अलमारियां आदि सामान रखा हुआ है उसे भी हटाने के निर्देश हैं। सचिव ने कहा कि कमेटी की पहली प्राथमिकता उर्स में आने वाले जायरीनों को सहूलियत देना है। तीनों बैठक में अंजुमन के प्रतिनिधियों के न आने पर सचिव ने कहा कि अब इस संबंध में विधिक राय ली जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *