जब-जब ज़ुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा, कहने पर देश भर में मौलाना महमूद मदनी के ख़िलाफ़ मचा बवाल।
मुर्दा कौमें मुश्किलात में मुब्तिला नहीं होती, सरेंडर कर देती हैं, वो कहेंगे कि वंदे मातरम् पढ़ो, तो पढ़ना शुरू कर देंगे : मौलाना महमूद मदनी

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर)
कितना बच बच के चले, वो तो गले भी मिले,
फिर भी निशाने पर आ ही गए, जमीयत उलमा ए हिंद के दोनों अध्यक्ष मौलाना अरशद और महमूद मदनी। अभी कुछ दिन पहले मौलाना अरशद मदनी के एक बयान पर मचा बवाल अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब मौलाना महमूद मदनी के भोपाल में जमीयत की बैठक में कही बातों को लेकर पूरा बखेड़ा खड़ा कर दिया गया है। जहां तहां जमीयत के अध्यक्ष के इन बयानों को लेकर बयानबाज़ी, प्रदर्शन और ग़लतबयानी की जा रही है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय बैठक जो भोपाल में हुई है को संबोधित करते हुए मौलाना महमूद मदनी ने जो कुछ कहा वह अब बवाले जान बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि
कि “जब-जब ज़ुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।” उन्होंने कहा है कि मीडिया और सरकार ने “जिहाद” शब्द को जानबूझकर गलत अर्थों में पेश किया है, जबकि इस्लाम में जिहाद का मतलब समाज की भलाई, इंसाफ और ज़ुल्म के ख़िलाफ खड़े होना है। मौलाना मदनी ने कहा कि उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष हमेशा जारी रहेगा।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय बैठक में मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि देश के मौजूदा हालात बहुत संवेदनशील और चिंताजनक हैं। दुख की बात है कि एक खास समुदाय को ज़बरदस्ती निशाना बनाया जा रहा है, बुलडोज़र एक्शन, मॉब लिंचिंग, वक्फ संपत्ति पर कब्ज़ा और धार्मिक मदरसों और सुधारों के ख़िलाफ़ नेगेटिव कैंपेन चलाए जा रहे हैं, ताकि उनके धर्म,पहचान और वजूद को कमज़ोर किया जा सके। इससे मुसलमान सड़कों पर चलते हुए भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई अहम फैसले,जैसे बाबरी मस्जिद और ट्रिपल तलाक के मामले,अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों के ख़िलाफ़ गए हैं और کہन्यायिक व्यवस्था पर सरकारी दबाव की झलक दिखाते हैं।
मौलाना महमूद मदनी के इन बयानों पर देश भर में एक बवाल खड़ा किया जा रहा है। अनेक ऐसे लोग जो अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात हैं वह तो गंदी भाषा तक का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिनमें डासना के यति नरसिंहानंद ने तो मौलाना मदनी को फांसी पर लटकाने की और दारुल उलूम देवबंद को बम से उड़ा देने की मांग कर दी है। मेरठ में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम ने कहा है कि जिहाद का समर्थन करने वाले को सनातनी लोग मारते-मारते पाकिस्तान तक छोड़ कर आएंगे। संगीत सोम यहीं नहीं रुके उन्होंने देश में मदरसों को बंद करने की अपील करते हुए कहा कि मदरसों से सिर्फ आतंकी ही निकलते हैं।
मौलाना महमूद मदनी के संबोधन में कही बातों ने संघी, बीजेपी और उनके तमाम सहयोगियों को तिलमिला दिया है। मौलाना महमूद मदनी अपने ‘जिहाद’ वाले बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। जबकि उन्होंने कहा है कि उनके बयानों को ट्विस्ट करके अलग तरीके से पेश किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मुसलमानों को सरकार और मीडिया ने बेबस बना दिया है। मदनी ने कहा कि वह अपने सारे बयानों पर क़ायम हैं और उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। मौलाना मदनी ने ज़ोर देकर कहा कि देश में हर आदमी को अपनी राय रखने का हक़ है उन्होंने इस बात पर नाराज़गी जताई कि जिहाद शब्द को एक ‘गाली’ बना दिया गया है जबकि मेरे लिए जिहाद एक मुकद्दस (पवित्र) काम है। उन्होंने एक चैनल पर आरोप लगाया कि मीडिया और सरकारों ने मुसलमानों को दीवार से लगा दिया है। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि अगर संविधान की प्रमुखता नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट भी सुप्रीम कहलाने लायक नहीं है । उन्होंने वंदे मातरम को लेकर भी तीखी टिप्पणी की, कि वंदे मातरम ज़बरदस्ती करके नहीं पढ़वा सकते। उन्होंने ये भी कहा कि मुर्दा कौमें मुश्किलात में मुब्तिला नहीं होती, सरेंडर कर देती हैं, वो कहेंगे कि वंदे मातरम् पढ़ो, तो पढ़ना शुरू कर देंगे।
इन सब बयानों को अलग अलग कोड करके मौलाना मदनी को ट्रोल किया जा रहा है यहां तक कि उनके कहे वाक्यों को देश विरोधी साबित करने की कोशिश की जा रही है।







