लोकतंत्र के तीन स्तंभ ढह गए हैं, मीडिया के हाथ में कलम की जगह कमल है : उद्धव ठाकरे
केवल न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद बची है

मुंबई (ब्यूरो चीफ़)
महाराष्ट्र में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भाजपा और उसके उच्च प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लोकतंत्र के तीन स्तंभ ढह गए हैं। मीडिया के हाथ में कलम की जगह कमल है। अब केवल न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद बची है कि न्यायपालिका न्याय का पतन नहीं होने देगी। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र और राज्य सरकार पर कड़ा निशाना साधा और कहा कि महाराष्ट्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नहीं बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने आकार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के तीन स्तंभ ढह गए हैं। मीडिया के हाथ में ‘कलम‘ की जगह ‘कमल‘ है। केवल न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट की उम्मीद बची है। न्यायपालिका न्याय का पतन नहीं होने देगी। उन्होंने पूछा, जब भाजपा ने रथयात्रा शुरू की थी तो हमने उनका समर्थन किया था। उनके पास केवल दो सांसद थे। लेकिन जब सरकार का गठन होना था और वे जयललिता और अन्य से समर्थन चाहते थे, तो अन्य दलों ने धर्मनिरपेक्षता के लिए आडवाणी के चेहरे का विरोध किया और अटल प्रधानमंत्री बने। तो किसने हिंदू धर्म, शिवसेना या भाजपा को छोड़ा? ठाकरे ने कहा, किसान मार्च नासिक से मुंबई आ रहा है। उनके विरोध पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे पहले भी किसानों ने मार्च निकाला था। इस दौरान आदित्य ठाकरे उनसे मिलने गए थे। लेकिन अब तक इस सरकार की तरफ से कोई भी बात करने नहीं गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे अपनी मांगों के लिए इतनी दूर आ रहे हैं। सीएम और डिप्टी सीएम को उनके पास जाना चाहिए और उनसे बात करनी चाहिए। पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा, दुनिया की सबसे बड़ी ताकत इस सरकार के पीछे है, जो दिल्ली में है, तो उन्हें इसे लागू करने में क्या समस्या आ रही है।







