हज़रत मौलाना शैख़ मोहम्मद याह्या (अमीर-ए-शरीअत एवं मुहतमिम दारुल उलूम बांस कुंडी, कछार (असम) ने की विशेष अपील

हम सब की धार्मिक ज़िम्मेदारी है कि हम हर क़ौमी मदरसे की उचित देखभाल और बेहतर प्रबंधन में हर संभव सहयोग प्रदान करें

बांस कुंडी, कछार (असम)(एशियन पत्रिका)

हज़रत मौलाना शैख़ मोहम्मद याह्या, अमीर-ए-शरीअत उत्तर-पूर्वी भारत एवं मुहतमिम दारुल उलूम बांस कुंडी, कछार (असम) ने एक विशेष अपील की है कि अल्लाह तआला के फ़ज़्ल व करम और बुज़ुर्गाने-दीन की कोशिशों से दारुल उलूम देवबंद और दारुल उलूम बांस कुंडी के मदरसों के मॉडल पर देश के विभिन्न स्थानों पर जो क़ौमी मदरसे स्थापित हुए हैं, वे देश और क़ौम की अमूल्य धरोहर हैं। वे वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए वास्तविक दीन, अर्थात इस्लामी शिक्षा का केंद्र हैं। इसलिए यह हम सब की धार्मिक ज़िम्मेदारी है कि हम हर क़ौमी मदरसे की उचित देखभाल और बेहतर प्रबंधन में हर संभव सहयोग प्रदान करें। यह हमारा दीनी फ़र्ज़ है कि हम इन मदरसों तथा इनके छात्रों और शिक्षकों के प्रति सच्चा सम्मान और प्रेम रखें।

इस महत्वपूर्ण विषय की ओर उम्मत-ए-मुस्लिमा का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने मरकज़ुल उलूम भांगा शरीफ़ मदरसा के वार्षिक सम्मेलन और अन्य सभाओं में छात्रों से चंदा एकत्र करने पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई है। और मैंने समाज के ज़िम्मेदार लोगों से आग्रह किया है कि वे चंदा एकत्र करने के इस महत्वपूर्ण कर्तव्य को निभाने के लिए आगे आएँ। मैंने मदरसों के शिक्षकों को आवश्यकता के अनुसार चंदा एकत्र करने से नहीं रोका है, और न ही समाज को उन्हें चंदा देने से मना किया है। उन्होंने कहा कि मेरी सभी दीनी भाइयों और बहनों से विशेष अपील है कि वे किसी भी प्रकार की गलतफ़हमी में पड़े बिना, क़ौमी मदरसों, मस्जिदों, मक़तबों, ग़रीबों व मिस्कीनों, यतीमों और विधवाओं की सहायता के लिए आगे आएँ। चंदा एकत्र करने में मदरसों के शिक्षकों की मदद करें और खुले हाथ व खुले दिल से दीन के इन अमूल्य शैक्षिक संस्थानों को हर प्रकार के दान और ख़ैरात से अधिक से अधिक मज़बूत और विकसित करें। अल्लाह तआला आपको और हम सबको, दोनों जहानों में उत्तम प्रतिफल प्रदान करे। आमीन।

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