नई पीढ़ी को किताबों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है : संदेश संगोष्ठी (विश्व पुस्तक मेला)

अध्ययन के बिना कोई भी व्यक्ति बाशऊर बुद्धिजीवी नहीं हो सकता: मासूम मुरादाबादी

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर/एशियन पत्रिका)

क़ौमी काउंसिल बराए फ़रोग़-ए-उर्दू ज़बान के तत्वावधान में विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान अध्ययन के महत्व पर एक अहम संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में जनाब मासूम मुरादाबादी, डॉ. ख़ालिद अलवी, प्रोफेसर मुश्ताक़ आलम क़ादरी और डॉ. इब्राहीम अफ़सर ने पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. अहसन अय्यूबी ने किया।

जनाब मासूम मुरादाबादी ने कहा कि पढ़ाई के बिना कोई भी इंसान जागरुक बुद्धिजीवी (बाशऊर) नहीं हो सकता। सोच में विस्तार और विविधता पैदा करने के साथ-साथ नई चीज़ों की जानकारी हासिल करने के लिए अध्ययन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भले ही यह डिजिटल युग है और लोगों के पास समय की कमी है, लेकिन आज किताबों तक लोगों की पहुँच पहले से कहीं अधिक हो चुकी है और घर बैठे भी अच्छी व गुणवत्तापूर्ण किताबों का अध्ययन संभव है। उन्होंने आगे कहा कि किताबें उन्हीं विषयों पर लिखी जानी चाहिए जिनकी वास्तव में ज़रूरत हो, घिसे-पिटे विषयों पर किताबें लिखना समय की बर्बादी है।

डॉ. ख़ालिद अलवी ने कहा कि पहले लोगों में पढ़ने की आदत हुआ करती थी और घरों में मेज़ों पर अलग-अलग पत्रिकाएँ और अख़बार रखे रहते थे, जिससे परिवार के सदस्यों में अपने आप पढ़ने का शौक पैदा हो जाता था। उन्होंने कहा कि किताब का कोई विकल्प नहीं है, जो व्यक्ति पढ़ता है वह दूसरों से आगे रहता है। आगे बढ़ने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अध्ययन ज़रूरी है। किताबों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज अच्छी और गुणवत्तापूर्ण किताबों की कमी महसूस की जा रही है, इसलिए आवश्यक है कि अच्छे और महत्वपूर्ण विषयों पर किताबें लिखी जाएँ।

प्रोफेसर मुश्ताक़ आलम क़ादरी ने कहा कि किताब और अध्ययन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि पाठ्य-पुस्तक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पाठक उसे बार-बार पढ़ सकता है और महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिन्हित भी कर सकता है, जिससे अध्ययन अधिक प्रभावी बनता है। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि मोबाइल फ़ोन और आधुनिक तकनीक के कारण विशेष रूप से युवाओं में पढ़ने की प्रवृत्ति कम हुई है, फिर भी किताब का महत्व अपनी जगह बरकरार है।

डॉ. इब्राहीम अफ़सर ने कहा कि जितना अधिक अध्ययन होगा, उतना ही व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, चेतना और वैचारिक परिपक्वता पैदा होगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अध्ययन न केवल ज्ञान में वृद्धि करता है, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व को भी निखारता है।

वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि अध्ययन के प्रसार के बिना एक स्वस्थ और सचेत समाज का निर्माण संभव नहीं है, इसलिए नई पीढ़ी को किताबों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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