असम में चुनाव ड्यूटी पर वन रक्षक तैनाती का आदेश वापस लेने की पूर्व सिविल सेवकों की आपात अपील, सुप्रीम कोर्ट निर्देशों का उल्लंघन।
असम में चुनाव ड्यूटी पर वन रक्षक तैनाती का आदेश वापस लेने की पूर्व सिविल सेवकों की आपात अपील, सुप्रीम कोर्ट निर्देशों का उल्लंघन।

- असम में चुनाव ड्यूटी पर वन रक्षक तैनाती का आदेश वापस लेने की पूर्व सिविल सेवकों की आपात अपील, सुप्रीम कोर्ट निर्देशों का उल्लंघन।
पंकज नाथ, असम , 31 मार्च:
संवैधानिक आचरण समूह (Constitutional Conduct Group) के 40 पूर्व सिविल सेवकों ने असम के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश को तत्काल वापस लेने की तत्काल मांग की है। इस आदेश में असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स (AFPF) के लगभग 1600 कर्मियों को आगामी असम विधानसभा चुनाव की ड्यूटी पर तैनात करने का निर्देश दिया गया है। पूर्व अधिकारियों ने इसे चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के 2024 के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। समूह ने पत्र में कहा है कि चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि क्षेत्रीय वन बलों और वन अधिकारियों, जिसमें भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, को चुनाव संबंधी ड्यूटी पर नहीं लगाया जा सकता। यह कदम वनों की सुरक्षा और पारिस्थितिकी संरक्षण को जोखिम में डालता है। मीडिया रिपोर्ट्स में प्रकाशित ‘असम चुनाव 2026: 1600 वन रक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने का फैसला चिंता का विषय’ के हवाले से उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है। पूर्व सिविल सेवकों ने चेतावनी दी है कि AFPF कर्मियों की तैनाती से असम के वैश्विक महत्व के वन्यजीवों की सुरक्षा कमजोर हो जाएगी। असम में भारतीय गैंडा (विश्व की सबसे बड़ी आबादी काजीरंगा नेशनल पार्क में), हूलॉक जिबन (भारत का एकमात्र वानर प्रजाति), गोल्डन लंगूर और पिग्मी होग जैसे संकटग्रस्त प्राणियों को खतरा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि काजीरंगा जैसे संरक्षित क्षेत्रों में शिकारियों और अतिक्रमण से बचाव के लिए निरंतर निगरानी जरूरी है। हाथी और बाघ जैसे अन्य वन्यजीव भी असुरक्षित हो जाएंगे। समूह ने 2024 के सुप्रीम कोर्ट आदेश (https://api.sci.gov.in/supremecourt/2017/6141/6141_2017_3_106_53250_Order_15-May-2024.pdf) का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने वन अधिकारियों और वन विभाग के वाहनों को चुनाव ड्यूटी से छूट दी है, क्योंकि यह विशेषीकृत और आवश्यक कार्य है। इस आदेश का पालन न करने से राज्य सरकार पर न्यायिक जांच का खतरा मंडरा रहा है। पत्र में मुख्य सचिव से अपील की गई है कि AFPF कर्मियों की तैनाती का आदेश फौरन वापस लिया जाए और भविष्य में ECI दिशानिर्देशों व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। समूह ने असम की पारिस्थितिक सुरक्षा, वनों और वन्यजीवों की रक्षा के हित में त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है। पत्र ‘सत्यमेव जयते’ के उद्घोष के साथ समाप्त हुआ है। हस्ताक्षरकर्ता समूह में जे.एल. बाजाज (पूर्व IAS), शरद बेहर (पूर्व मध्य प्रदेश मुख्य सचिव), मधु भदुड़ी (पूर्व IFS), हर्ष मंदर (पूर्व IAS), नजीब जंग (पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल), जुलियो रिबेरो (पूर्व IPS) सहित 40 पूर्व अधिकारी शामिल हैं। यह पत्र असम की राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस को नई ऊंचाई दे सकता है, खासकर चुनावों के बीच।







