मुफ़्ती मुहम्मद सना-उल-हुदा क़ासमी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाज़ा गया

उर्दू भाषा व साहित्य में उनकी बहुमूल्य सेवाओं के सम्मान में डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिली।

नई दिल्ली/कटिहार-बिहार (अनवार अहमद नूर )

इल्म और अदब की दुनिया में कुछ शख़्सियतें ऐसी होती हैं जो सिर्फ़ अपने दौर की नुमाइंदगी नहीं करतीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए भी फ़िक्र के चिराग़ रोशन कर जाती हैं। इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा, झारखंड व पश्चिम बंगाल के नायब नाज़िम, मशहूर आलिम-ए-दीन और विशिष्ट शैली के लेखक मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद सना-उल-हुदा क़ासमी ऐसी ही उज्ज्वल शख़्सियतों में शुमार हैं, जिनका जीवन ज्ञान, शोध, दावत और साहित्य के सुंदर समन्वय से परिपूर्ण रहा है।

10 जनवरी 2026 (शनिवार) को अल-करीम यूनिवर्सिटी, कटिहार (बिहार) ने उर्दू भाषा व साहित्य के क्षेत्र में उनकी बहुमूल्य सेवाओं के सम्मान में उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। यह सम्मान वास्तव में उर्दू तहज़ीब, इस्लामी विचारधारा और गंभीर शैक्षिक परंपरा की एक गरिमामयी विजय है। यह उपाधि बिहार के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान के कर-कमलों से प्रदान की गई। इस गरिमामय समारोह में अल-करीम यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अशफ़ाक़ अहमद करीम, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर शाहिद अख़्तर, मौलाना नज़र-उल-हुदा क़ासमी, मुफ़्ती ज़फ़र-उल-हुदा क़ासमी तथा बिहार सरकार के कई मंत्रियों की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी यादगार बना दिया।

मुफ़्ती सना-उल-हुदा क़ासमी की शैक्षिक और साहित्यिक सेवाएँ किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने जहाँ दीनि विचार को संतुलन, दूरदर्शिता और समकालीन चेतना के साथ प्रस्तुत किया, वहीं उर्दू भाषा को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विरासत के रूप में अपनाया। उनकी रचनाओं में भाषा की शालीनता, विचारों की गहराई और समाज के प्रति संवेदना की स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस बौद्धिक परंपरा का आदर है जिसमें कलम को अमानत और ज्ञान को इबादत समझा जाता है।डॉक्टरेट की यह मानद उपाधि वस्तुतः उस शांत परिश्रम, निरंतर साधना और निस्वार्थ सेवा की स्वीकृति है, जो मुफ़्ती साहब ने वर्षों तक ज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में निभाई है। यह क्षण विद्वानों के लिए हर्ष का और उर्दू जगत के लिए गर्व का है। अल्लाह तआला मुफ़्ती मुहम्मद सना-उल-हुदा क़ासमी को उत्तम स्वास्थ्य, तंदुरुस्ती और दीर्घायु प्रदान करे, तथा उन्हें और अधिक नेक कार्यों, शैक्षिक सेवाओं और समुदाय के मार्गदर्शन की तौफ़ीक़ दे, ताकि उनका फ़ैज़ आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह निरंतर पहुँचता रहे।

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