कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को यूपी पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर देने का हो रहा है विरोध
ये केवल प्रशासनिक गलती ही नहीं बल्कि संविधान पर खुला हमला है : चंद्रशेखर आज़ाद(सांसद नगीना क्षेत्र)


बिजनौर (यूपी) (एशियन पत्रिका/अनवार अहमद नूर)
उत्तर प्रदेश के बहराइच में कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए बहराइच के पुलिस अधीक्षक (SP) को तलब किया है और निर्धारित प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर जवाब मांगा है। क्योंकि अगर सरकारी तंत्र की बात करें तो गार्ड ऑफ ऑनर देने का प्रावधान आमतौर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्य व केंद्रीय मंत्रियों या उच्च प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए ही होता है। नियमों के मुताबिक किसी कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का इससे पहले कोई उदाहरण सामने नहीं आया है। ऐसे में इस असामान्य फैसले को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं और जहां एक ओर पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है वहीं दूसरी ओर अनेक राजनीतिक लोगों ने भी इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है।
ज्ञात रहे कि उत्तर प्रदेश के बहराइच में 8 नवंबर को कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को यूपी पुलिस की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का मामला जैसे ही संज्ञान में आया तो इस पर चर्चा होने लगी। यूपी पुलिस के इस काम की आलोचना करने वाले लगातार इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जनपद बिजनौर के नगीना क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश पुलिस को कठघरे में खड़ा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट लिखकर उन्होंने इसे न केवल प्रशासनिक गलती, बल्कि संविधान पर खुला हमला बताया है। सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है और राज्य किसी धर्म विशेष की जागीर नहीं है। इसके बावजूद कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को यूपी पुलिस की ओर से परेड और सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दिया जाना बेहद गंभीर मामला बनता है।







